Posts

क्षणिकाएं...

(1) रक्त वाहिकाओं से मिलकर बनता रक्त परिसंचरण तंत्र,  ठीक वैसे ही से जन- गण के "मत" से बनता सशक्त लोकतंत्र।  वोट अगर एक "नाक" है तो जन हैं उसके आयाम,  इनकी ही शक्तियों से पोषित होकर बनता देश महान।। -लोकतंत्र के संदर्भ में (2)उसने कहा - बहुत व्यस्त हो आजकल? मैंने मुस्कराकर कहा- अपने आप से ही फुर्सत नहीं मिलती...  -एकांत में (3) नूर-ए-जन्नत फ़िर जवां हो गई हो जैसे, और फिज़ाओं में बहार छाने लगी है। -लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड बहुमत के सन्दर्भ में

मंज़िल

मंजिल... चलते-चलते शाम हो गई, तूने कहा बस अब पहुंचने वाले हैं, कुछ कदम और चल लो, मंजिल अब करीब आई है, फिर कुछ दूर चले ही थे  कि कदम थकने लगे, तुमने कहा बस आ गये, चंद कदम और मंजिल के लिये, राह के संघर्ष और थपेडों से दुखने लगी मेरी काया है मन को इधर संभालू तो  साथ नहीं देती साया है जी करता है तोड लूं नाता  सारी दुनिया से फिर, लगता है मुझ सा कमजर्फ कोई ना  होगा इस दुनिया में, जिंदगी के इतने रंग दिखाया जिंदगी ने लगता है केवल मुझे ही चुना था जिंदगी ने, निराशा के भंवर में डूबती उतरती, मंजिल के करीब न जाने कब पहुंचती, अब रात होने को आई है, फिर भी न दिखाई देती मंजिल है... ----------------------

मिशन इम्पॉसिबल : फॉल आऊट

Image
हॉलीवुड फिल्मों के सफलता के गैरेंटर बनते भारतीय दर्शक  **** आज की फिल्म  - मिशन इम्पॉसिबल :  फॉल आऊट जॉनर- एक्शन स्पाई  राइटर एंड डायरेक्टर - क्रिस्टोफर मैक्वेरी  प्रोडक्शन कम्पनी- बैड रोबोट  डिस्ट्रब्युटर- पैरामाउंट पिक्चर्स मूवी लेंथ- 147 मिनट  रेटिंग - फाइव स्टार  कॉस्ट एंड क्रू - टॉम क्रूज (एथन हंट), रेबेका फग्र्युसन (इलसा), वानेसा किर्बी (व्हाइट विडो), शॉन हैरिस (सोलोमन लेन), मिशेल मोनागन (जुलिया), सिमोन पेग्ग (बेंजी) और विंग रहामेज (लुथर स्टीकेल),हेनरी कैविल (वॉकर), एंजेला बैसेट (एरिका) इत्यादि।  **** बीते शुक्रवार को रिलीज हुई हॉलीवुड अभिनेता टॉम क्रुज की फिल्म मिशन इम्पॉसिबल 6 : फॉल आऊट यानी एमआई 6 ने बॉलीवुड की दो फिल्मों जाह्नवी कपूर स्टारर धड़क और संजय दत्त की साहब, बीवी और गैंगस्टर 3 की लोकप्रियता को कम करते हुए अपने रिलीज के तीसरे दिन ही 39 करोड़ रुपये से भी अधिक का कारोबार करके यह बता दिया है कि हॉलीवुड की फिल्मों की सफलता और कमाई के गैंरेटर अब भारतीय दर्शक भी हैं। हाल के कुछ वर्षों में हॉलीवुड फिल्मों ने भारतीय म...

बहने और बढ़ने का नाम है जिंदगी...

कभी किसी का जीवन एक जैसा या स्थिर नहीं होता। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और जीवन में पैनापन इन्हीं उतार-चढ़ाव से आता है। उदाहरण के तौर पर तालाब के स्थिर जल में कोई नवीनता नहीं रहती। तालाब का जल पीलापन लिये और गहराई में गाद-मिट्टी जम जाती है। ठीक इसके विपरीत बहती हुई नदी का जल स्वच्छ और पारदर्शी  होता है। तीव्र वेग से बहती हुई नदी को पहाड़-पर्वतों और चट्टानों का सामना करना पड़ता है परंतु इसका वेग कभी कम नहीं होता। हमाारा जीवन भी नदी के समान है जिसमें कई तरह की मुश्किलें और परेशानियां आती हैं फिर भी हम उन्हें पार करके सदैव आगे की ओर बढ़ते जाते हैं। अंतिम समय में नदी जाकर समुद्र से मिल जाती है। जीवन का अंत भी विशाल परमात्मा के साथ अंगीकार करते हुए होता है। सही मायने में यही जीवन है और जीवन की सच्ची परिभाषा भी बहना और बढ़ना ही है...